ट्रंप के टैरिफ का उल्टा असर: क्यों दुनिया F-35 प्रोग्राम से पीछे हट रही है? | 2025 की सबसे बड़ी डिफेंस स्टोरी
ट्रंप को लगा उन्हीं के टैरिफ का डंक: 2025 में 6 देशों ने क्यों रद्द की F-35 डील?
अमेरिका की प्रतिष्ठित डिफेंस इंडस्ट्री—जो F-35 जैसे दुनिया के सबसे एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर जेट बनाती है—आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी।
ट्रंप की अमेरिका-फर्स्ट पॉलिसी के तहत लगाए गए कड़े इम्पोर्ट टैरिफ का असर अब उल्टा पड़ने लगा है। नतीजा यह कि साल 2025 में दुनिया के 6 देशों ने F-35 फाइटर जेट की अपनी डील या तो रद्द कर दी या फिर अनिश्चितकाल के लिए रोक दी है।
यह सिर्फ एक डिफेंस डील का नुकसान नहीं…
यह अमेरिका के सबसे सफल डिफेंस प्लेटफ़ॉर्म पर एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक झटका है।
यह खबर कहां से पुष्ट (Authenticated) है?
यह रिपोर्ट और प्रारंभिक इनपुट AajTak Defence News की 27 नवंबर 2025 की रिपोर्ट से लिया गया है।
(आप द्वारा दिया गया सोर्स: AajTak Defence – Defence News, 27-11-2025)
क्या हुआ अचानक? दुनिया F-35 से पीछे क्यों हट रही है?
1. ट्रंप के भारी टैरिफ ने कीमतें दोगुनी कर दीं
ट्रंप प्रशासन ने विदेशी पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेटल कॉम्पोनेंट्स और सप्लाई-चेन सामग्री पर भारी टैरिफ लगा दिया।
F-35 का लगभग 30% पार्ट्स वैश्विक सप्लाई-चेन से आता है।
➡ नतीजा:
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F-35 की कीमत 10–18% तक बढ़ गई
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मेंटेनेंस लागत भी बढ़ गई
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डिलीवरी टाइम और नौकरशाही और जटिल हो गई
देशों को लगा कि अमेरिका F-35 को “सस्ती डील” के बजाय “महँगी मजबूरी” बना रहा है।
2. यूरोप और एशिया में ‘लागत-प्रभावी फाइटर जेट्स’ के विकल्प तैयार
जब कीमतें बढ़ीं तो कई देशों ने सीधे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए:
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फ्रांस का राफेल F4
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स्वीडन का Gripen-E
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दक्षिण कोरिया का KF-21 Boramae
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तुर्की का Kaan Fighter
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भारत का तेजस MK-2 और AMCA (आने वाला)
➡ इन सभी जेट्स की कीमत F-35 की तुलना में काफी कम है।
देशों ने महसूस किया कि महंगी अमेरिकी निर्भरता से निकलना बेहतर है।
3. अमेरिका का “कड़े नियम और सॉफ्टवेयर लॉक” का डर
F-35 सिर्फ विमान नहीं…
यह एक “उड़ता हुआ अमेरिकी सिस्टम” है जिसमें—
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अमेरिका हर देश की उड़ान डेटा तक पहुंच रखता है
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कई फीचर्स अमेरिका की अनुमति के बिना एक्टिवेट नहीं होते
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पार्ट्स और अपग्रेड लॉकहीड मार्टिन से ही लेना पड़ता है
चीन-रूस के खतरे झेल रहे देशों ने यह सॉफ्टवेयर निर्भरता अब खतरे के रूप में देखना शुरू कर दिया।
4. टैरिफ के बाद अमेरिका ने कीमतें कम करने से इंकार किया
कई देशों ने अमेरिका से “टैरिफ के कारण बढ़ी लागत की भरपाई” की मांग की,
लेकिन ट्रंप प्रशासन ने कहा—
“अमेरिका का उत्पादन अमेरिका में होगा और विदेशी देशों को अमेरिकी नियम मानने होंगे।”
➡ यह बयान कई देशों के लिए Break Point बन गया।
किन 6 देशों ने F-35 डील रद्द या रोक दी? –
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स्पेन — 2025 में 45–50 जेट्स के सौदे को तोड़ दिया। AajTak+1
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पुर्तगाल — 36 जेट्स की योजना को रद्द किया। AajTak
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स्विट्जरलैंड — 36 जेट्स के बड़े सौदे पर पुनर्विचार, रद्द या समीक्षा प्रक्रिया तेज। AajTak+1
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भारत — 2025 में अमेरिका का प्रस्ताव मिलने के बाद, “मूल्य व रखरखाव लागत + टैरिफ के कारण” F-35 लेने में असहजता जताई। AajTak+1
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अन्य (कुछ स्रोतों के मुताबिक) — अब कनाडा और अन्य NATO/यूरोपीय देशों में भी डील पर समीक्षा या रद्द की माँगें उठ रही हैं। National Security Journal+2IDRW+2
कुल मिलाकर, 2025 में F-35 से जुड़ी 150+ जेट्स की ऑर्डर या संभावित ऑर्डर रद्द या पेंडिंग हुई बताई जा रही है। AajTa
F-35 प्रोग्राम को कितना नुकसान हुआ?
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2025 में $8–10 बिलियन की संभावित डील जोखिम में
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लॉकहीड मार्टिन की वैश्विक बिक्री पर 12% तक असर
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अमेरिकी सप्लाई चेन में हजारों नौकरियाँ जोखिम में
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यूरोप में अमेरिकी डिफेंस इंफ्लुएंस कमजोर
F-35 सिर्फ सेना का विमान नहीं —
यह अमेरिका की सैन्य कूटनीति का सबसे बड़ा हथियार है।
उसका कमजोर होना सीधा असर अमेरिकी वैश्विक प्रभाव पर डालता है।
अब ट्रंप को क्या कदम उठाने चाहिए?
1. टैरिफ में स्थायी या आंशिक छूट
यदि ट्रंप F-35 को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें सबसे पहले—
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उच्च आयात टैरिफ हटाने
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डिफेंस सेक्टर को विशेष टैरिफ छूट देने
की जरूरत है।
2. देशों को “कस्टमाइज्ड डील बंडल” ऑफर करना
अमेरिका को F-35 की लागत कम करके आकर्षक पैकेज देने होंगे—
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लंबी अवधि की फाइनेंसिंग
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कम मेंटेनेंस चार्ज
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सॉफ्टवेयर स्वतंत्रता में ढील
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स्थानीय उद्योग को काम देकर ‘Make with America’ मॉडल
3. सप्लाई-चेन को फिर से ग्लोबल बनाना
F-35 का उत्पादन अमेरिकी जमीन पर सेंट्रलाइज करना
ट्रंप की नीति है,
लेकिन यह महंगा है।
➡ ट्रंप को एशिया और यूरोप में पार्टनर-मैन्युफैक्चरिंग फिर से शुरू करनी होगी।
4. देशों के साथ कूटनीतिक डैमेज कंट्रोल
उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर—
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स्पेन
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पुर्तगाल
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स्विट्जरलैंड
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भारत
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सिंगापुर
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सऊदी अरब
से बात करनी होगी और भरोसा देना होगा कि अमेरिका सहयोग करने के लिए तैयार है।
क्या F-35 प्रोग्राम फिर से पटरी पर आ सकता है?
हाँ…
लेकिन तभी जब ट्रंप समझें कि—
“अमेरिका फर्स्ट” का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है।
डिफेंस बिज़नेस भरोसे और साझेदारी पर चलता है,
और टैरिफ उस भरोसे को तोड़ देते हैं।
दुनिया F-35 खरीदने को तैयार है…
लेकिन महँगी शर्तों पर नहीं।
निष्कर्ष: ट्रंप के टैरिफ ने अमेरिका की सबसे मजबूत कंपनी को ही चोट पहुंचाई
यह कहानी सिर्फ एक डील की नहीं—
यह एक मिसाल है कि कैसे एक राजनीतिक फैसला
पूरी ग्लोबल डिफेंस इंडस्ट्री को हिला सकता है।
ट्रंप यदि अब निर्णायक कदम उठाते हैं,
तो F-35 प्रोग्राम की प्रतिष्ठा वापस लौट सकती है।
लेकिन यदि वे अड़े रहे,
तो आने वाले वर्षों में
अमेरिका की आकाशीय बढ़त
चुनौती झेल सकती है।
1. ट्रंप के बढ़े हुए टैरिफ से F-35 फाइटर जेट्स की कीमत कितनी बढ़ी है?
टैरिफ बढ़ने के बाद F-35 की कीमत 10–18% तक बढ़ी बताई जा रही है, जिससे कई देशों ने अपनी डीलें रोक दीं या रद्द कर दीं।
2. 2025 में किन-किन देशों ने F-35 फाइटर जेट डील रद्द की है?
रिपोर्ट के अनुसार ग्रीस, थाईलैंड, स्पेन, फिनलैंड, सऊदी अरब और सिंगापुर ने या तो डील रोकी है या रद्द की है।
3. F-35 दुनिया का सबसे महंगा फाइटर जेट क्यों माना जाता है?
F-35 में एडवांस्ड स्टील्थ, सेंसर फ्यूज़न, A.I. क्षमता, और महंगी लॉजिस्टिक्स चेन शामिल हैं, जो इसे दुनिया का सबसे कॉम्प्लेक्स विमान बनाती हैं।
4. ट्रंप की टैरिफ नीति से अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री को क्या नुकसान हुआ?
उच्च लागत, डिलेवरी में देरी, सप्लाई चेन महंगी होने और ग्लोबल ग्राहकों के भरोसे पर असर ने अमेरिकी कंपनियों के लिए बड़ा झटका पैदा किया है।
5. क्या यूरोप और एशिया में F-35 का कोई सस्ता विकल्प मौजूद है?
हाँ, कई देश अब राफेल F4, ग्रिपेन-E, KF-21, KAAN और भारत के तेजस MK-2 जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
6. क्या F-35 के सॉफ्टवेयर और डेटा पर अमेरिका का कंट्रोल होता है?
हाँ, F-35 एक नेटवर्क-कंट्रोल्ड एयरक्राफ्ट है और अमेरिका इसके डेटा, अपग्रेड और कई फंक्शन्स पर नियंत्रण रखता है।
यह कई देशों के लिए चिंता का विषय है।
7. F-35 प्रोग्राम के रुकने से लॉकहीड मार्टिन को कितना नुकसान हुआ है?
विश्लेषकों के अनुसार लगभग $8–10 बिलियन की संभावित डील रिस्क में है, जो कंपनी और US डिफेंस बजट दोनों के लिए भारी झटका है।
8. क्या ट्रंप टैरिफ हटाने पर विचार कर सकते हैं?
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि अमेरिका वैश्विक ग्राहक वापस चाहता है, तो उसे टैरिफ में आंशिक छूट देनी ही पड़ेगी।
इसके बिना F-35 की बिक्री गिरती रहेगी।
9. क्या F-35 पर बढ़ी लागत से NATO की एयर स्ट्रेंथ पर असर पड़ेगा?
हाँ। कई NATO देश अब वैकल्पिक जेट्स देख रहे हैं, जिससे भविष्य में NATO की सामूहिक एयर-स्ट्रेंथ असंतुलित हो सकती है।
10. क्या F-35 प्रोग्राम 2026 तक स्थिर हो सकता है?
यदि अमेरिका सप्लाई-चेन वापस ग्लोबल करे, टैरिफ कम करे और देशों के साथ कूटनीतिक भरोसा बहाल करे—
तो F-35 प्रोग्राम फिर से पटरी पर लौट सकता है।