बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है हाल ही में सत्ता में आए अंतरिम शासन ने ऐसा कदम उठाया है जिसने भारत बांग्लादेश संबंधों को नई बसों के केंद्र में ला दिया है अंतरिम सरकार ने भारत को एक औपचारिक पत्र लिखकर साफ कह दिया है की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को मानवता के खिलाफ अपराधों के दोषी हैं और दोनों को बांग्लादेश वापस भेजा जाना चाहिए।
यह मांग सिर्फ एक सामान्य कूटनीति प्रक्रिया नहीं है बल्कि ढाका की नई सत्ता संरचना के बदलते रख और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के परिवर्तन की ओर इशारा करती है इसी के साथ उन्होंने भारत को चेतावनी जैसी सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि इन लोगों को शरण देना न्याय का अपमान है। और इसे अशांति पूर्ण कदम माना जाएगा।
कैसे बदल गया बांग्लादेश का सत्ता संतुलन।
बांग्लादेश की राजनीति पिछले कुछ महीनो में तेजी से बदली है कई वर्षों तक सत्ता में रही शेख हसीना की सरकार के खिलाफ अचानक जन असंतोष बड़ा जिसे विपक्ष और अलग अलग संगठनों ने जोर पकड़वाया। इस माहौल में सी समर्थित अंतरिम सरकार का गठन हुआ जिसने देश में राजनीतिक और प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
अंतरिम सरकार ने सत्ता संभालते ही पिछले शासन काल के खिलाफ कई गंभीर आरोपों की जांच शुरू की इन्हें आरोपों में मानवाधिकार उलझन और मानवता के खिलाफ अपराध शामिल है।
सरकार का दावा है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जिनके आधार पर विशेष अदालत ने शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री को सजा ए मौत सुनाई है लेकिन दोनों देश छोड़कर भारत पहुंच चुके हैं।
नई सरकार ने भारत को क्यों लिखा पत्र-?
अंतरिम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार भारत को भेजे गए पत्र में यह स्पष्ट उल्लेख है कि दोनों दोषियों को आश्रय देना अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौते के खिलाफ है।
उन्होंने एक विशेष प्रत्यर्पण संधि का भी हवाला दिया है जिसके अंतर्गत गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्तियों को दोनों देशों को एक दूसरे को सपना की व्यवस्था का प्रावधान है।
ढाका का कहना है कि भारत 9 सिर्फ एक पड़ोसी देश है बल्कि एक भरोसेमंद साझेदारी भी है इसलिए वह इस संधि के मुताबिक तत्काल कार्रवाई करें। और दोनों को बांग्लादेश भेजें।
हालांकि यह भी स्पष्ट है कि भारत पर यह कदम राजनीतिक दबाव की तरह भी देखा जा रहा है। क्योंकि फिलहाल दोनों देशों की सरकारें बदली परिस्थितियों में अपने रिश्तों का नया संतुलन तलाश रही है।
ढाका की भाषा नरमी कम सख्ती ज्यादा।
पत्र में इस्तेमाल किए गए शब्द यह बताने के लिए काफी है कि अंतरिम सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है उन्होंने सीधे-सीधे लिखा है कि।
भारत द्वारा फरार दोषियों को शरण देना न्याय का अपमान होगा।
यह बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप जैसा लगेगा।
दोनों देशों की दोस्ती को इससे आघात पहुंचेगा।
शेख हसीना की स्थिति राजनीतिक शरण या राजनीतिक संकट-?
शेख हसीना कई दशकों तक बांग्लादेश की राजनीतिक का केंद्र रही है उनके शासनकाल में भारत बांग्लादेश संबंध मजबूत हुए और दोनों देशों ने सुरक्षा व्यापार व सीमा मामलों में एक दूसरे का साथ दिया।
जानकारों का कहना है कि।
हसीना की सुरक्षा को लेकर भारत बराबर सतर्क हैI
उन्हें शरण दी जा रही है या सिर्फ अस्थाई संरक्षण इस पर भारत ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा।
भारत सरकार इस मामले में संतुलन बनाने की स्थिति में है क्योंकि एक तरफ पुराने राजनीतिक रिश्ते हैं और दूसरी तरफ बांग्लादेश की नई सरकार की संवेदनशील मांग।
कुछ जानकार का यह भी मानना है कि भारत तत्काल कोई कड़ा कदम नहीं उठाएगI क्योंकि इसमें बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।
क्या भारत बाध्य है प्रत्यर्पण करने को।-?
बांग्लादेश का दावा है कि दोनों देशों के बीच एक ऐसी संधि है जिसके तहत दोषियों को वापस भेजना अनिवार्य है लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अधिक जटिल हो सकती है। कई मामलों में प्रत्यर्पण तब तक नहीं किया जाता जब तक अपराध न्यायिक रूप से साफ ना हो या राजनीतिक प्रतिशोध की संभावना न हो। भारत आमतौर पर ऐसे मामलों में कानूनी और कूटनीतिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखता है। यदि भारत यह मानता है कि आरोपों का स्वरूप राजनीतिक है तो वह प्रत्यर्पण से इनकार भी कर सकता है।
अभी तक भारत की ओर से किसी भी स्तर पर ना तो पुष्टि आई है और ना ही खंडन इससे संकेत मिलते हैं कि मामला काफी संवेदनशील है।
नई भू राजनीतिक स्थिति को कैसे समझे।
भारत और बांग्लादेश के बीच हमेशा से सुरक्षा सीमा प्रबंधन और आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं लेकिन इस नए घटनाक्रम ने दोनों देशों के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जिसका जवाब सीधा नहीं है अगर भारत से शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजता है तो वहां उनकी जान को खतरा हो सकता है और भारत को अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित हो सकती है लेकिन अगर भारत उन्हें शरण देता है तो ढाका की नई सरकार नाराज हो सकती है और अपने रुक को भारत के खिलाफ कठोर बना सकती है यह स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती बन गई है।
आने वाले दिनों में क्या हो सकता है।
विशेषज्ञ तीन संभावनाओं की बात कर रहे हैं।
भारत समय मांगेगा ताकि कानूनी और राजनीतिक पक्षों का अध्ययन किया जा सके।
एक तटस्थ जवाब देगा, जिसमें कहा जाएगा कि मामले का मूल्यांकन किया जा रहा है।
कूटनीतिक बातचीत बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी बड़े टकराव से बचा जा सके।
यह भी संभव है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार समय के साथ अपने रूप में कुछ नरमी लाए क्योंकि भारत से तनाव पैदा होने पर उसे आर्थिक और सुरक्षा मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

